Saturday, February 22, 2025
Follow us on
ब्रेकिंग न्यूज़
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर का जर्मनी प्रवास के दौरान प्रवासी भारतीयों ने अभिनंदन किया।एचआरटीसी निदेशक मंडल ने लगभग 700 बसें खरीदने की मंजूरी दीबेटियां सभ्यता और समाज की अमूल्य धरोहर : कैप्टन रणजीत सिंह राणाउपायुक्त ने जवाहर नवोदय विद्यालय पेखूबेला का किया औचक निरीक्षण, परीक्षा केंद्र और मरम्मत कार्यों का लिया जायजाएलएडीएफ का 10 फीसदी निधि सुख आश्रय और सुख शिक्षा योजना पर होगी खर्च - उपायुक्तग्रामीण विकास विभाग और अल्ट्राटेक सीमेंट ने गैर पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए समझौता ज्ञापन किया हस्ताक्षरितअंतर-सीपीएसयू क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन कियाप्रदेश में नशा, अवैध खनन, अपराध चरम पर, सरकार समोसे खोजने में व्यस्त : जयराम
-
कहानी

पिता और व्यापारी ; हरदीप सबरवाल

-
ब्यूरो हिमालयन अपडेट 7018631199 | February 25, 2022 08:46 AM
हरदीप सबरवाल

 


कस्बा देहात के बाजार में जगत की पुश्तैनी परचून की दुकान है, पिता की मौत के बाद से लगभग 10 साल से वह इसे चला रहा है, मृदुभाषी होने के कारण उसके ग्राहकी अच्छी है और दुकान का काम भी अच्छा चल रहा है सबसे बड़ी बात यह है कि वह सुबह 6:00 बजे ही दुकान खोल लेता और रात के 10:30-11:00 बजे तक दुकान खुली रखता है, दूकान से कभी छुट्टी लेने के बारे में उसने कभी सोचा ही नहीं, घर तीन किलोमीटर दूर गांव में है, आसपास के लोगों से भी उसके संबंध अच्छे है,जीवन सुखी चल रहा है. एक दिन अचानक ही जगत शाम को 7:00 बजे दुकान बंद कर के चला गया, आसपास के दुकानदार सब अपनी-अपनी ग्राहकों में व्यस्त थे इसलिए उन्हें पता नहीं चला. अगली सुबह भी दुकान देर से खोली और शाम को 7:00 बजे के आसपास दुकान बंद करके जाने लगा तभी पड़ोसी दुकानदार पास आ गया और पूछा, "क्या बात है जल्दी जा रहे हो, घर में सब कुशल मंगल तो है, कल भी जल्दी चले गऐ थे?".


" हां भाई, वैसे तो सब कुशल मंगल है, पर क्या बताऊं आपको, बेटी ढाई साल की हो गई है जब सुबह दुकान पर आता हुं तब वो सोई रहती थी और जब रात को जब वापस जाता तब भी वह सोई मिलती, दो ढाई साल में उसने कभी देखा ही नहीं मुझे, परसों रात जब मैं घर गया तो वो जाग रही थी, मुझे देख दौड़ कर माँ की गोद चढ़ गई और बोली, "माई ये कौन है? अचानक धक्का सा लगा, क्या फायदा है ऐसे जीवन का, अब सुबह आठ बजे दुकान खोलुगां और रात को सात बजे तक घर वापसी, आखिर परिवार को भी तो थोड़ा वक्त दे दूं".


पड़ोसी दुकानदार को लगा कि एक पिता एक व्यापारी से जीत गया है.....

 

-
-
Have something to say? Post your comment
-
और कहानी खबरें
-
-
Total Visitor : 1,71,35,800
Copyright © 2017, Himalayan Update, All rights reserved. Terms & Conditions Privacy Policy